브로커 पहले काफी कुछ मैन्युअली करना पड़ता था, अब ज़्यादातर चीज़ें ऑटोमैटिक हैं। ट्रेड लॉगिंग से लेकर रिस्क कैलकुलेशन तक सब अपने आप हो जाता है। इससे एनालिसिस और रिव्यू के लिए ज़्यादा समय मिलता है। Jan 16 at 05:51